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3 बजे तक जींद में 60% और रामगढ़ में 68% मतदान; 31 जनवरी को आएंगे नतीजे

जींद/अलवर. हरियाणा के जींद और राजस्थान के रामगढ़ में विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान जारी है। जींद में सुबह 3 बजे तक 60% और रामगढ़ में 68.83 फीसदी वोट पड़े। दोनों सीटों पर शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे। कांग्रेस ने जींद सीट पर राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता रणदीप सिंह सुरजेवाला को टिकट दिया है। सुरजेवाला कैथल से विधायक हैं। भाजपा ने दिवंगत विधायक डॉ. हरिचंद मिड्‌ढा के बेटे कृष्ण मिड्‌ढा और जननायक जनता पार्टी ने दिग्विजय चौटाला को उम्मीदवार बनाया है। दोनों सीटों के नतीजे 31 जनवरी को आएंगे। रणदीप सुरजेवाला ने सुबह मंदिर में पूजा की। जजपा उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला भी मंदिर गए। दिग्विजय ने डीएवी स्कूल में बने बूथ पर जाकर वहां की व्यवस्था का जायजा भी लिया।  दिग्विजय चौटाला ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के लोग पैसों की खेप के साथ पकड़े गए हैं। रणदीप सुरजेवाला रात 3 से 4 बजे तक कुछ असमाजिक तत्वों के साथ गांवों में घूमते रहे। लोग इनकी सोच को समझ चुके हैं। मैं जीत के लिए आश्वस्त हूं। भाजपा उम्मीदवार कृष्ण मिड्ढा ने मां के साथ पोलिंग बूथ पहुंचकर वोट डाला। उन्होंने कहा कि वे जीत के...

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में गुरमीत राम रहीम को उम्रक़ैद

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या 2002 में हुई थी. अदालत ने गुरमीत राम रहीम को 11 जनवरी को इस मामले में दोषी क़रार दिया था. डेरा प्रमुख के साथ तीन अन्य लोगों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृ ष्ण लाल को भी दोषी ठहराया गया था. इन्हें भी उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है. डेरा सच्चा सौदा की सीनियर वाइस चेयरपर्सन शोभा इंसां ने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है. ट्वीट करके उन्होंने यह भी कहा है कि इस मा मले में आगे क़ानूनी प्रक्रिया चलाई जाएगी. जिस कोर्ट ने राम रहीम को पत्रकार की हत्या के मामले में सज़ा सुनाई, इसी कोर्ट ने अगस्त 2017 में राम रहीम को रेप केस में भी दोषी क़रार दिया था. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने ही साल 2002 में इस रेप केस की जानकारी पहली बार दी थी. इस मामले में भी बलात्कार वाले मामले में गुरमीत राम रहीम को सज़ा सुनाने वाले जज जगदीप सिंह ने ही सज़ा सुनाई. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति 2002 में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल...

वो देश जहां की जाती है अपराधियों की 'पूजा'

कच्चे तेल के बड़े निर्यातकों में से एक वेनेज़ुएला की शोहरत दुनिया में अमरीका के दुश्मन के तौर पर है. इसी की वजह से इस देश ने उठा-पटक का लंबा दौर देखा है. ह्यूगो शावेज़ की अगुवाई में यहां साम्यवादी शासन स्थापित हुआ था. शावेज़ की मौत के बाद उनके वारिस निकोलस मादुरो के राज में यहां भारी अराजकता फैली हुई है. जुर्म का बोल-बाला है. ऐसे में यहां के लोगों का अपराधियों को देवता के तौर पर मानना अजीब लगता है. यहां पुराने और इस दुनिया से गुज़र चुके अपराधियों के बुत बनाकर उन्हें पूजा जाता है. उन्हें चढ़ावा चढ़ाया जाता है. स्पेनिश ज़बान में इन अपराधी देवताओं को सैंटोस मैलेंड्रोस कहते हैं. पुराने दौर के इन बदनाम अपराधियों के छोटे-छोटे बुतों को एक जगह पर रखा गया है. इन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. ऐसे ही एक मैलेंड्रो का नाम है लुई सांचेज़. लुई सांचेज़ अपने दौर का बहुत ताक़तवर अपराधी था. आज उसका बुत लगाकर पूजा की जाती है. सवाल ये है कि आख़िर वेनेज़ुएला के लोग, अपराधियों को देवता मानकर उनकी पूजा क्यों करते हैं. असल मे इन अपराधियों की छवि जनता के बीच रॉबिनहुड वाली रही है. वो, जो ...

आर्य बाहर से भारत आए थे: नज़रिया

दक्षिणपंथी मानते हैं कि भारतीय सभ्यता उनसे निकली है, जो ख़ुद को आर्य कहते थे. यह घुड़सवारी करने वाले और पशुपालन करने वाले योद्धाओं और चरवाहों की एक घुमंतू जनजाति थी जिन्होंने हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथों यानी वेदों की रचना की थी. वे कहते हैं कि आर्य भारत से निकले और फिर एशिया और यूरोप के बड़े हिस्सों में फैल गए. इसी से उन इंडो-यूरोपियन भाषाओं का विस्तार हुआ जो आज यूरोप और भारत में बोली जाती हैं. एडोल्फ़ हिटलर और मानव जाति के इतिहास का अध्ययन करने वाले यूरोप के कई लोग 19वीं सदी में यह मानते थे कि आर्य ही वह मुख्य नस्ल थी जिसने यूरोप को जीता. लेकिन एडोल्फ़ हिटलर का मानना था कि आर्य नॉर्डिक थे यानी वे उत्तरी यूरोप से निकले थे. जब भी जानकार लोग आर्य शब्द इस्तेमाल करते हैं, इसका मतलब उन लोगों से होता है जो इंडो-यूरोपियन भाषाएं बोलते थे और ख़ुद को आर्य कहते थे. ऐसे में मैंने भी इस लेख में 'आर्य' को इसी संदर्भ में इस्तेमाल किया है. यह किसी नस्ल के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया है, जैसे कि हिटलर ने इसे इस्तेमाल किया या फिर कुछ हिंदू दक्षिणपंथी इसे इस्तेमाल करते हैं. ...

लोजपा ने बिहार में 7 सीटें मांगी, 31 दिसंबर तक का वक्त दिया; कहा- बूंद-बूंद से भरता है तालाब

लोकसभा चुनाव में बिहार में सीट शेयरिंग के फैसले में देरी को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) की नाराजगी बढ़ती जा रही है। पार्टी के नेता पशुपति पारस ने भाजपा से 7 सीटें मांगी हैं। उन्होंने कहा कि हम 31 दिसंबर तक फैसले का इंतजार करेंगे। उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन पर कहा कि बूंद-बूंद से तालाब भरता है। इससे पहले लोजपा सांसद चिराग पासवान ने ट्वीट कर कहा था कि सीटों पर वक्त रहते बात ना बनी तो नुकसान हो सकता है। भाजपा-जदयू ने समझौता किया, हमें पूछा तक नहीं- पशुपति पशुपति ने कहा- भाजपा और जदयू ने आधी-आधी सीटों पर समझौता कर लिया और लोजपा को पूछा तक नहीं। अगर आप हमसे बात नहीं करेंगे तो हम पीछे-पीछे क्यों दौड़ेंगे? भाजपा को गठबंधन धर्म का पालन करना चाहिए। 'हम विश्वसनीय सहयोगी' पशुपति ने कहा, "भाजपा को एनडीए में शामिल बिहार की सभी पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्षों के साथ बैठक कर फैसला करना चाहिए था। रालोसपा एनडीए से अलग हो गई। जीतन राम मांझी की पार्टी पहले ही अलग हो चुकी है। एनडीए में बिखराव हो रहा है। यह मुश्किल घड़ी है। बूंद-बूंद से तालाब भरता है। हम एनडीए के सहयोगी हैं, विश...

'ख़ुदा करे, यह दंगा आख़िरी साबित हो'

सीतामढ़ी में अमूमन हर साल दशहरे के समय छिटपुट हिंसा की घटना होती है. लेकिन, इस साल स्थिति इतनी भयानक होगी, इसका अंदाज़ा नहीं था. ग़लती प्रशासन की थी. जब पहले दिन ही झड़प हो गयी थी तो दशहरे के दिन अतिरिक्त बल को तैनात क्यों नहीं किया गया? इनकी ग़लती ने एक बुज़ुर्ग की जान ले ली . ख़ुदा करे, यह दंगा आखि़री साबित हो". यह मानना है एक स्थानीय व्यवसायी का, जो अपनी पहचान ज़ाहिर करना नहीं चाहते. दरअसल, बिहार की राजधानी पटना से क़रीब 170 किमी. उत्तर में स्थित सीतामढ़ी में 20 अक्तूबर को उग्र भीड़ ने लगभग 82 साल के एक बुज़ुर्ग ज़ैनुल अंसारी को चाक़ू मारने के बाद ज़िंदा जला दिया था. उसी दिन भीड़ के दूसरे शिकार इसी गांव के मोहम्मद साबिर अंसारी बने थे. पेशे से मज़दूर लगभग 65 साल के साबिर दवा ख़रीदकर आ रहे थे तभी उन पर हमला हुआ. भोड़हा गांव के पूर्व मुखिया और मृत ज़ैनुल अंसारी के रिश्तेदार नन्हें अंसारी उस दिन की घटना के बारे में बताते हैं, "सुबह क़रीब दस-ग्यारह बजे मैं भोड़हा से मधुबन जाने के लिए निकला. गांव से क़रीब दस किमी. दूर गौशाला चौक पर देखा की बड़ी बाज़ार पूजा समिति की म...

कर्नाटक उपचुनाव में बीजेपी की हार के मायने क्या

कर्नाटक उप-चुनावों में कांग्रेस-जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) को मिली जीत जहां इस गठबंधन के लिए कई मायनों में ख़ास है, वहीं पांच सीटों में से चार सीटें जीतकर पार्टी ने बीजेपी विरोधी दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों को ये साफ़ संदेश भी दे दिया है कि एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को हराना संभव है. जेडीएस के साथ गठबंधन पर कांग्रेस की एक सोची -समझी रणनीति समझ आती है. मई में विधानसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद देने का वादा किया और हाथ मिलाया . ये साझेदारी काम भी कर गई और पांच सीटों पर हुए उप-चुनावों में से सिर्फ़ एक सीट ही बीजेपी के हक़ में गई है. बीजेपी ने सिर्फ़ शिवमोगा लोकसभा सीट पर जीत हासिल की है. लेकिन, ये चुनावी नतीजे ये भी दिखाते हैं कि जिस तरह से बीजेपी में गुटबाज़ी चल रही है, इससे बीजेपी के जमखंदी निर्वाचन क्षेत्र में जीतने की उम्मीद भी ख़त्म हो सकती है जहां लिंगायत प्रमुख और प्रभावशाली समुदाय है. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने लोकसभा की मंड्या सीट (जेडीएस) और बल्लारी (एसटी) (कांग्रेस) पर जीत हासिल की है और विधानसभा सीटों की ब...