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लोजपा ने बिहार में 7 सीटें मांगी, 31 दिसंबर तक का वक्त दिया; कहा- बूंद-बूंद से भरता है तालाब

लोकसभा चुनाव में बिहार में सीट शेयरिंग के फैसले में देरी को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) की नाराजगी बढ़ती जा रही है। पार्टी के नेता पशुपति पारस ने भाजपा से 7 सीटें मांगी हैं। उन्होंने कहा कि हम 31 दिसंबर तक फैसले का इंतजार करेंगे। उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन पर कहा कि बूंद-बूंद से तालाब भरता है। इससे पहले लोजपा सांसद चिराग पासवान ने ट्वीट कर कहा था कि सीटों पर वक्त रहते बात ना बनी तो नुकसान हो सकता है। भाजपा-जदयू ने समझौता किया, हमें पूछा तक नहीं- पशुपति पशुपति ने कहा- भाजपा और जदयू ने आधी-आधी सीटों पर समझौता कर लिया और लोजपा को पूछा तक नहीं। अगर आप हमसे बात नहीं करेंगे तो हम पीछे-पीछे क्यों दौड़ेंगे? भाजपा को गठबंधन धर्म का पालन करना चाहिए। 'हम विश्वसनीय सहयोगी' पशुपति ने कहा, "भाजपा को एनडीए में शामिल बिहार की सभी पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्षों के साथ बैठक कर फैसला करना चाहिए था। रालोसपा एनडीए से अलग हो गई। जीतन राम मांझी की पार्टी पहले ही अलग हो चुकी है। एनडीए में बिखराव हो रहा है। यह मुश्किल घड़ी है। बूंद-बूंद से तालाब भरता है। हम एनडीए के सहयोगी हैं, विश...

'ख़ुदा करे, यह दंगा आख़िरी साबित हो'

सीतामढ़ी में अमूमन हर साल दशहरे के समय छिटपुट हिंसा की घटना होती है. लेकिन, इस साल स्थिति इतनी भयानक होगी, इसका अंदाज़ा नहीं था. ग़लती प्रशासन की थी. जब पहले दिन ही झड़प हो गयी थी तो दशहरे के दिन अतिरिक्त बल को तैनात क्यों नहीं किया गया? इनकी ग़लती ने एक बुज़ुर्ग की जान ले ली . ख़ुदा करे, यह दंगा आखि़री साबित हो". यह मानना है एक स्थानीय व्यवसायी का, जो अपनी पहचान ज़ाहिर करना नहीं चाहते. दरअसल, बिहार की राजधानी पटना से क़रीब 170 किमी. उत्तर में स्थित सीतामढ़ी में 20 अक्तूबर को उग्र भीड़ ने लगभग 82 साल के एक बुज़ुर्ग ज़ैनुल अंसारी को चाक़ू मारने के बाद ज़िंदा जला दिया था. उसी दिन भीड़ के दूसरे शिकार इसी गांव के मोहम्मद साबिर अंसारी बने थे. पेशे से मज़दूर लगभग 65 साल के साबिर दवा ख़रीदकर आ रहे थे तभी उन पर हमला हुआ. भोड़हा गांव के पूर्व मुखिया और मृत ज़ैनुल अंसारी के रिश्तेदार नन्हें अंसारी उस दिन की घटना के बारे में बताते हैं, "सुबह क़रीब दस-ग्यारह बजे मैं भोड़हा से मधुबन जाने के लिए निकला. गांव से क़रीब दस किमी. दूर गौशाला चौक पर देखा की बड़ी बाज़ार पूजा समिति की म...

कर्नाटक उपचुनाव में बीजेपी की हार के मायने क्या

कर्नाटक उप-चुनावों में कांग्रेस-जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) को मिली जीत जहां इस गठबंधन के लिए कई मायनों में ख़ास है, वहीं पांच सीटों में से चार सीटें जीतकर पार्टी ने बीजेपी विरोधी दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों को ये साफ़ संदेश भी दे दिया है कि एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को हराना संभव है. जेडीएस के साथ गठबंधन पर कांग्रेस की एक सोची -समझी रणनीति समझ आती है. मई में विधानसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद देने का वादा किया और हाथ मिलाया . ये साझेदारी काम भी कर गई और पांच सीटों पर हुए उप-चुनावों में से सिर्फ़ एक सीट ही बीजेपी के हक़ में गई है. बीजेपी ने सिर्फ़ शिवमोगा लोकसभा सीट पर जीत हासिल की है. लेकिन, ये चुनावी नतीजे ये भी दिखाते हैं कि जिस तरह से बीजेपी में गुटबाज़ी चल रही है, इससे बीजेपी के जमखंदी निर्वाचन क्षेत्र में जीतने की उम्मीद भी ख़त्म हो सकती है जहां लिंगायत प्रमुख और प्रभावशाली समुदाय है. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने लोकसभा की मंड्या सीट (जेडीएस) और बल्लारी (एसटी) (कांग्रेस) पर जीत हासिल की है और विधानसभा सीटों की ब...

उलझे हुए थे इंदिरा और फ़िरोज़ के रिश्तों के तार

इंदिरा गांधी और उनके पति फिरोज़ गांधी के बीच रिश्तों के तार काफी उलझे हुए थे. लेकिन इंदिरा ने फिरोज़ की मौत के बाद एक ख़त में लिखा कि जब भी उन्हें फिरोज़ की ज़रूरत महसूस हुई वो उन्हें साथ खड़े दिखे . दोनों के बीच तनाव तब शुरू हुआ जब इंदिरा अपने दोनों बच्चों को लेकर लखनऊ स्थित अपना घर छोड़ कर पिता के घर आनंद भवन आ गईं. शायद ये संयोग नहीं था लेकिन इसी साल यानी 1955 में फिरोज़ ने कांग्रेस पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान शुरू किया. इंदिरा गांधी इसी साल पार्टी की वर्किंग कमेटी और कंद्रीय चुनाव समिति सदस्य बनी थीं. उन दिनों संसद में कांग्रेस का ही वर्चस्व था. विपक्षी पार्टियां ना केवल छोटी थीं बल्कि बेहद कमज़ोर भी थीं. इस कारण नए बने भारतीय गणतंत्र में एक तरह का खालीपन था. हालांकि फ़िरोज़ सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े परिवार के करीब थे, वो विपक्ष के अनौपचारिक नेता और इस युवा देश के पहले व्हिसलब्लोअर बन गए थे. उन्होंने बड़ी सावधानी से भ्रष्ट लोगों का पर्दाफ़ाश किया जिस कारण कईयों को जेल जाना पड़ा, बीमा उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया गया और वित्त मंत्री को इस्तीफ़ा तक देना पड...